Indian Electricity Rules ,1956 UPPCL – IMRE

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नमस्कार दोस्तो आज के इस पोस्ट में हम ‘भारतीय विद्युत नियम की जानकारी'( Knowledge of indian electricity rules ) को बहुत ही सरल शब्दों में समझेंगे।

जिस प्रकार एक कंपनी में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कुछ नियम बनाये जाते है उसी प्रकार भारत मे विद्युत से सम्बंधित कुछ नियम बनाये गए है जिसका पालन एक विद्युत अभियंता को करना चाहिए।

एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में इलेक्ट्रिकल संस्थापन व रिपेयर से संबंधित कार्य को करते समय सुरक्षा , सावधानी का पालन करना आवश्यक होता है। इसलिए कुल 143 नियम बनाये गए है कुछ मुख्य नियम को हम समझने की कोशिश करते है।

indian electricity rules 1956
Indian Electricity Rules

Indian Electricity Rules 1956 [भारतीय विद्युत नियम 1956]

नियम-28  यह नियम वोल्टेज (Voltage) से सम्बंधित है।

  • Low voltage – 250 वोल्ट से कम
  • Medium voltage- 250 से 650 वोल्ट तक
  • High voltage- 650 से 33kv तक
  • Extra high voltage- 33kv से ज्यादा

नियम-29  इस नियम के अनुसार लाइन चालक व मशीन इस प्रकार होने चाहिए कि जिस कार्य के लिए उसे बनाया गया है उसको अच्छी तरह पूरा कर सके, और ये लाइन चालक व मशीन ISI मानक के अनुसार होने चाहिए।

नियम-30  इस नियम के अनुसार सप्प्लायर को इस बात की संतुष्टि होना चाहिए कि विद्युत सप्लाई के तार,मशीन, लाइन सुरक्षित स्थिति में है और जो भी उपकरण उपभोक्ता के मकान में लगी है वो भी सुरक्षित स्थिति में है और वैद्युत शक्ति सप्लाई के हर हालत में योग्य है। सप्लायर इस बात की सावधानी रखेगा की इन लाइन ,मशीन से उस भवन में किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न न हो सके।

यदि सर्विस लाइन इस स्थिति में है कि कोई व्यक्ति  वहां तक पहुच सकता है तो उनको विद्युतरोधित किया जाएगा और सुरक्षा रखी जायेगी।

नियम-31 indian electricity rules for earthing – यह नियम अर्थिंग से सम्बंधित है इस नियम के अनुसार जिन कंडक्टर में अर्थिंग नही है उनमे एक आयरन क्लैड स्विच अवश्य होना चाहिए तथा यह स्विच एक निश्चित स्थान पर होना चाहिए।

नियम-32- यह नियम भी अर्थिंग से सम्बंधित है इसके अनुसार जहाँ पर भी अर्थिंग हो वहां पर इंडिकेशन अवश्य लगाना चाहिए तथा consumer के स्वयं के एरिया में अर्थिंग होना चाहिए इसके साथ अर्थिंग को वही से स्टार्ट करना चाहिए जहा से सप्लाई स्टार्ट होती हो।

नियम-33 मीडियम ,हाई व एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज के लिए अर्थिंग अवश्य किया जाना चाहिए।अर्थिंग के रख-रखाव व देखभाल की जिम्मेदारी उपभोक्ता की होगी।

नियम-34 इस नियम के अनुसार यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए यदि नंगे या खुले चालक को लगाया गया है तो किसी भी व्यक्ति का पहुंच वहाँ तक न होता हो। पहुँच योग्य स्थान पर स्विच लगाया जाएगा ताकि आवश्यकता के समय तुरंत सभी चालक को dead किया जा सके।

नियम-35 जहाँ पर हाई वोल्टेज या अधिक रेटिंग के ट्रांसफॉर्मर या लाइन का प्रयोग किया गया हो वहां पर खतरे का निसान बनाना चाहिए, पोल पर भी खतरे का निशान बना रहना चाहिए।

इनके साथ यह भी शर्त है कि जहाँ जनित्र ,मोटर

,ट्रांसफॉर्मर या अन्य मशीन किसी स्थान के अंदर है तो उस घेरे पर एक सूचना पत्र लगा देना चाहिए।

नियम-36 जब भी किसी मशीन पर कार्य तो उस मशीन की बॉडी में अर्थिंग का प्रयोग कर चार्ज को डिस्चार्ज कर देना चाहिए। कोई भी व्यक्ति किसी जीवित वैद्युत सप्लाई लाइन या मशीन पर काम नही करेगा और कोई व्यक्ति उस व्यक्ति की इस काम मे सहायता नही करेगा जब तक उसको इसके लिए अधिकार प्राप्त न हो और निरीक्षक से स्वीकृत की हुई सावधानियों का पालन न किया जा रहा हो।

नियम-38  यह नियम इंसुलेशन से संबंधित होता है। मोटर ,जेनरेटर ,ट्रांसफॉर्मर, इलेक्ट्रिक स्प्रे आदि में उचित इंसुलेशन किया जाना चाहिए। और इन्हें टूटने फूटने से बचाने का प्रबंध हो।

नियम-42 मशीन को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाना चाहिए की उस पर रेटेड वोल्टेज से अधिक वोल्टेज अप्लाई करने पर उसका इन्सुलेशन न जले तथा मशीन ख़राब न हो।

नियम-43 इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन , जनित्र केंद्र ,और घिरे हुए स्टेशनों में उपयुक्त स्थान पर वैद्युत से लगी आग बुझाने के लिए अग्निशामक यन्त्र होना चाहिए तथा सुखी रेत से भरी बाल्टी भी रखना चाहिए

नियम-44  इलेक्ट्रीक सबस्टेशन ,स्विचिंग स्टेशन में वैद्युत झटका खाये हुए व्यक्ति की चिकित्सा के सम्बंध में ट्रीटमेंट का चार्ट होना चाहिए।

नियम-45 वैद्युत संस्थापन ,फिटिंग आदि कार्य स्टेट गवर्मेंट द्वारा पंजीकृत व्यक्ति के द्वारा किया जाना चाहिए।

नियम-46 किसी भी विद्युत संस्थापन के निरीक्षण का टाइम 5 साल से अधिक नही होना चाहिए तथा इसका चार्ज उपभोक्ता के द्वारा ही दिया जाना चाहिए।

नियम-47 जब तक सप्लायर के पूरी तरह से जांच ना कर ली जाए तब तक उसके द्वारा विद्युत का कनेक्शन नही दिया जाना चाहिए यदि वह पूरी तरह से संतुष्ट न हो तो कनेक्शन देने से मना भी कर सकता है। सप्लायर उपभोक्ता को समस्या या फाल्ट को सही करने के निर्देश देगा।

नियम-48 यदि लीकेज करंट का मान रेटेड करंट के 1/5000 वे भाग से अधिक है तो सप्लायर सप्लाई देने से मना कर सकता है।

नियम-50 उचित परिपथ वियोजक का प्रयोग किया जाना चाहिए।विद्युतरोधी पदार्थ ऐसा होना चाहिए जो की पर्यावरण प्रभाव से मुक्त हो ,किसी भी लाइव तार को खुला नही छोड़ना चाहिए।

नियम-56 स्टार तीन फेज 4 तार कनेक्शन में नूट्रल वायर को अर्थ किया जाना चाहिए।

न्यूटल को सही तरीके से जांच लिया जाना चाहिए, सभी इक्विपमेंट के फ्रेम को अर्थ किया जाना चाहिए।

नियम-75 ओवरहेड लाइन जहां पर भी कनेक्ट हो वहाँ मैकेनिकल स्ट्रेंथ उसके नार्मल स्ट्रेंथ से 95% कम ना हो।

नियम-85 विद्युत वितरण लाइन में दो खंभो के बीच की अधिकतम दूरी 67 मीटर (220फ़ीट) होना चाहिए ।( ट्रांसमिशन लाइन में प्रयुक्त टावर के अतिरिक्त)

नियम-90 यह नियम अर्थिंग से सम्बंधित होता है।लाइन में 1.6 मीटर में 4 अर्थिंग पॉइंट होना चाहिए।स्टेवायर जमीन से 3 मीटर तक इंसुलेटेड हो।

तो दोस्तो उम्मीद है आज के पोस्ट से आपको समझ मे आ गया होगा कि indian electricity rules क्या है। मैंने सारे रूल को कवर नही किया क्योंकि पोस्ट ज्यादा बड़ा हो जाता, अगर आप ऊपर के सारे  रूल को पढ़ लेते है तो एग्जाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से सम्बंधित अगर आपके मन मे कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते है।

पॉलीटेक्निक पीडीएफ( polytechnic pdf ) से जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद।


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